Saturday, 4 November 2017

रहने दे

तेरी  ये तमन्ना, तेरा ये अरमान रहने दे
ये बेबस और लाचार भगवान रहने दे

मेरा एक ख़्वाब रोज़ दफ़न होता है, फिर ज़िंदा होता है
अब ये कब्रिस्तान वब्रिस्तान रहने दे

शराब, बर्बादी, शायरी, बदनामी, कुछ भी ना हुआ
इश्क़, और  इतना आसान? रहने दे

तेरी किस्मत के कीचड़ मे कमल एक खिल चुका
अब उस ग़ुलाब का ख़याल-ए-इम्कान रहने दे 

इतनी हिक़ारत से जो देखता है मुझको तू, जी नहीं पायेगा
मुझमे किसी खूबी का तू ख़ुदको गुमान रहने दे

किस बुलंदी पर था "तेरा आदि"  क्यूँकर हुआ बर्बाद
ज़वाल-ए-आफ़ताब की अब ये दास्तान रहने दे




- १३ आदि