Wednesday, 4 October 2017

किसी काम का नहीं..

तेरी  ये तमन्ना, तेरा  ये अरमान  किसी  काम का नहीं
ये  पत्थर का भगवान किसी काम का नही

मेरा एक  ख़्वाब यहाँ रोज़ दफन होता है, फिर ज़िंदा होता है
लगता है ये कब्रिस्तान किसी काम का नही

शराब, बर्बादी, शायरी, बदनामी, कुछ भी ना हुआ
इश्क़ इतना भी आसान किसी काम का नही

तेरी किस्मत के कीचड़ मे कमल कोई खिल चुका
अब उस ग़ुलाब का ख़याल-ए-इम्कान  किसी काम का नही

जो बरसों से तेरी कमीज़ पर सजा रखा है
अब वो मेहँदी का निशान किसी काम का नही


- १३ आदि

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