Thursday, 5 October 2017

नही जानता...

कैसे कह दूँ के उसकी खुशबू नहीं जानता
तो क्या हुआ के उसको रूबरू नही जानता

मेरे अंदर भी कुछ ग़ज़लें बिखरी पड़ी हैं
मगर कम्बख्त मै उर्दू नहीं जानता

मै माहताब बनकर चमकूँगा उसके छत पर
वो आज मुझको जुगनू नहीं जानता

अभी इस ग़ज़ल में चंद अशार बाकी हैं
अभी मै आपको  "आप" जानता हूँ , "तू " नहीं जानता...

- १३ आदि

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